संस्कृत में शिक्षा शब्द "शासु अनुशासने" से बना है। प्राचीन मनीषियों की दृष्टि में शिक्षा वही थी जो भीतरी क्षमताओं व सम्भावनाओं को केवल बाहर न निकाले, उन्हें अनुशासित भी करे। वाणी, व्यवहार और आचरण में उन्हें यथास्थान सजा दे। शिक्षा व्यक्ति को परिष्कृत बनाती है। गुरुकुल शिक्षा प्रणाली यह एक समन्वित शिक्षा पद्धति है, जिसमें प्राचीन आश्रम प्रणाली को आधार बनाकर बालिकाओं के बौद्धिक, चारित्रिक गुणों का विकास किया जाता है। गुरुकुल शिक्षा पद्धति में आचार्या एवं शिष्या का निकटतम सम्पर्क एक प्रधान तत्त्व है। प्राचीन शास्त्रीय शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक विषयों की शिक्षा प्रदान करना गुरुकुल की एक निजी विशेषता है। महर्षि दयानन्द की निश्चित धारणा थी कि गुरुकुल शिक्षा प्रणाली तथा आर्षपाठविधि ही वह मार्ग है जिस पर चलकर मनुष्य का शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक विकास हो सकता है।
कन्या गुरुकुल महाविद्यालय, हाथरस में बालिकाओं को उत्कृष्ट संस्कार और सदाचार से सुभूषित बनाते हुए आधुनिक सामाजिक परिवेश के अनुसार शारीरिक, मानसिक, आत्मिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना ही कन्या गुरुकुल का शैक्षिक उद्देश्य है|